Parichay Book

अखिल भारत हिन्दू महासभा का गठन

हिन्दुस्थान की सबसे पहली राजनैतिक पार्टी हिन्दू महासभा का गठन देश के विभिन्न प्रान्तों में 1882 में ही हो गया था। हिन्दू महासभा के नेतृत्व में पूरे देश में भारत की आजादी का आंदोलन चल रहा था। प्रखर राष्ट्रवादी नेता पं० मदन मोहन मालवीय ने पूरे देश के हिन्दू महासभा नेताओं, क्रांतिकारियों, राजा–महाराजाओं की एक सभा पवित्र हरिद्वार में वैशाखी के दिन 1915 में रखी। उस सभा में राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारत हिन्दू महासभा का गठन किया गया। जिसमें महाराजा मनीन्द्र चन्द्र नन्दी को प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। दूसरे राष्ट्रीय अधिवेशन में पं० मदन मोहन मालवीय को राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर, भाई परमानन्द, डॉ० वी. एस. मुंजे, महंत अवैध नाथ, एन. सी. चटर्जी, स्वामी श्रद्धानन्द जैसे महान नेताओं ने हिन्दू महासभा का नेतृत्व किया है। स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा हिन्दू महासभा के नेतृत्व में शुद्धि आंदोलन चलाया गया, जिसमें हिन्दू धर्म से अलग हो गये परिवारों को हिन्दू धर्म में वापस लाया गया। स्वातंत्र्य वीर सावरकर जी ने पतिता उद्धार सभा का गठन कर हिन्दू महासभा के नेतृत्व में पूरे देश में सामाजिक एकता का मूल मंत्र दिया। उन्होंने पहली बार दलितों को मंदिरों में प्रवेश दिलाया। भारत की स्वतंत्रता व हिन्दू, हिन्दी, हिन्दुस्थान की रक्षा के कार्य में हिन्दू महासभा के योगदान को कभी भूला नहीं जा सकता है। हिन्दू महासभा अखंड हिन्दू राष्ट्र के लिये कृत संकल्प है तथा हिन्दू हितों के लिए तत्पर है।

प्रगति और विस्तार की ओर हिन्दू महासभा
सन् 2006 में हिन्दू महासभा के युवा नेता श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक, श्री मुन्ना कुमार शर्मा एवं श्री वीरेश त्यागी को नेतृत्व का भार सौंपा गया। यह हिन्दू महासभा के इतिहास की युगान्तरकारी घटना थी क्योंकि हिन्दुत्ववादी चिन्तन और हिन्दू महासभा की राष्ट्रवादी सोच को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का क्रांतिकारी कार्य आरम्भ हुआ। अत्यंत गर्व का विषय है कि इन लोगों के युवा नेतृत्व ने युवा पीढ़ी को हिन्दुत्व अभियान से जोड़कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक परिवेश में नवीन युग की आधारशिला रखी। वर्षों तक निष्प्राण पड़ी हिन्दू महासभा देश के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रियहीन हैं, वहां के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य को प्रभावित भी कर रही है। इसका सुफल भी दिखाई देने लगा है। हिन्दू महासभा के प्रयासों से दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों में यह इस लेख का तीसरा पृष्ठ (Page 3) है, जो पिछले पृष्ठ के अधूरे वाक्य को पूरा करते हुए आगे बढ़ता है। यहाँ इसका पूरा लिप्यंतरण दिया गया है:

ईसाई धर्मान्तरण पर रोक लगी है। जिस स्थिति में कथित हिन्दूवादी संगठन भी मुस्लिम तुष्टिकरण की राह पर चलने लगे हैं, ऐसे में हिन्दू महासभा प्रखर राष्ट्रवाद की न केवल समर्थक है अपितु उसकी विस्तारक भी हैं।

हिन्दू महासभा का हिन्दुत्व प्रचार अभियान
हिन्दू महासभा यह मानती है कि बिना वैचारिक क्रांति से आधारभूत परिवर्तन नहीं लाया जा सकता। इसलिये हिन्दू महासभा की ओर से इस्लामी आतंकवाद और ईसाई धर्मान्तरण की कुटिल चालों को अनावृत करने वाली कई लाख पुस्तकें निःशुल्क वितरित की गई। हिन्दू महासभा का मुख पत्र साप्ताहिक हिन्दू सभावार्ता भारत के प्रमुख वैचारिक साप्ताहिको में गिना जाता है। उसकी प्रसार संख्या और लोकप्रियता निरन्तर बढ़ रही है। हिन्दुत्व और राष्ट्रत्व के प्रचारक के रूप में वह विश्व का एक मात्र पत्र है।

प्रकोष्ठ आधारित संगठन
वर्तमान नेतृत्व ने यह अनुभव किया कि हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना को तब ही सार्थक किया जा सकता है जब राष्ट्रवादी विचारों और हिन्दू संस्कारों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचायें। इस हेतु चालीस से अधिक प्रकोष्ठ बनाये गये और उनके गठन एवं विस्तारण का कार्य गति से चल रहा है।

वैश्विक आधार पर हिन्दुत्व का प्रचार

विश्वभर में प्रवासी हिन्दुओं की संख्या छह करोड़ हैं। हिन्दू महासभा ने यह अनुभव किया कि राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू चेतना के कार्य के अतिरिक्त वैश्विक आधार पर हिन्दुत्व का प्रचार–प्रसार तथा हिन्दू संस्कारों को संरक्षण आवश्यक है। साथ ही बौद्ध राष्ट्रों में भी हिन्दू महासभा का गठन होना चाहिये। इस हेतु हिन्दू महासभा ने जापान, दक्षिणी अफ्रीका और मारीशस में हिन्दू महासभा की स्थापना की और तेरह अन्य देशों में हिन्दू साहित्य भेजने की व्यवस्था थी।

इन्टरनेट पर हिन्दुत्व

हिन्दुत्व का चिन्तन वैश्विक स्तर पर सरलता के साथ विस्तार ग्रहण करें, इस हेतु इन्टरनेट सूचना तकनीक का सहारा लिया गया। इसका लाभ यह हुआ कि पश्चिमी देशों पर हिन्दू धर्म का प्रचार हुआ और हिन्दू महासभा का प्रचार हुआ।

राजनीतिक कार्य

हिन्दू महासभा का कार्य बहुआयामी है। लेकिन राजधर्म को भी महत्व देना महासभा अपना कर्त्तव्य समझती है। हिन्दुत्ववादी सोच के विस्तार और राजनीति में राष्ट्रहित की अवधारणा को प्रतिष्ठित करने के लिये हिन्दू महासभा द्वारा विभिन्न विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी खड़े किये गये। कुछ प्रत्याशियों को काफी समर्थन भी मिला।

भावी योजना

  1. ग्राम-ग्राम तक हिन्दू महासभा का विस्तार।

  2. जातिविहीन समाज की स्थापना हेतु जागरूक हिन्दू समाज की संरचना।

  3. हिन्दू चिन्तन को आधार मानते हुये भारतीय राजनीतिक की दिशा को पूर्णतया राष्ट्रवादी दिशा की ओर मोड़ना।

आजादी की लड़ाई में योगदान

हिन्दू महासभा के मंच से आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सर्वश्री लाला जगतनारायण, लाला हरदयाल, महाराजा मनीन्द्रचन्द्र नन्दी, पं० मदन मोहन मालवीय, श्रीमंत राजा रामपाल सिंह, स्वामी श्रद्धानन्द, शंकराचार्य डॉ० कुर्तकोटि, श्री एन० सी केलकर, लाला लाजपत राय, राजा राजेन्द्र नाथ, लक्ष्मण बलवन्त भोपटकर, डा० नारायण भास्कर खरे, श्री एन० सी० चटर्जी, प्रो० प्रेमसिंह, प्रो० बी० जी० देशपांडे, महन्त दिग्विजय नाथ, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वीर सावरकर दामोदर सावरकर, शंकराचार्य भारतीकृष्ण तीर्थ, भिक्षु उत्तम, भाई परमानन्द, श्री विजयराम राघवाचार्य, श्री रामानन्द चट्टोपाध्याय, डॉ० बालकृष्ण सदाशिव मुंजे, रास बिहारी बोस, डॉ हेडगेवार, मि० गोगटे, श्री लाहिड़ी आदि क्रांतिकारी नेताओं का योगदान रहा है। इनमें से अधिकतर महापुरुष समय–समय पर हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे।

संसद और हिन्दू महासभा

हिन्दू महासभा के कई प्रमुख नेता संसद में पहुँचे और देश व जनता के हितों की आवाज बड़े प्रभावशाली तरीके से संसद के समक्ष रखा है। हिन्दू महासभा के सांसद निम्न रहे हैं:– एन० सी० चटर्जी, वी० जी० देश पाण्डे, डॉ० एन बी० खरे, सुशीला नैयर, सेठ विशन चन्द्र, महन्त दिग्विजय नाथ, पं० ब्रज नारायण ब्रजेश, महन्त अवैध नाथ आदि।

हिन्दू महासभा के जनप्रतिनिधि

आजादी से पूर्व नेशनल असेम्बली के लिये भाई परमानन्द अम्बाला सीट से निर्वाचित हुए थे। आजादी से पूर्व स्टेट कोटे से डॉ० नारायण भास्कर खरे व अन्य प्रतिनिधि नेशनल असेम्बली में मनोनीत हुए थे। आजादी से पूर्व सिन्ध प्रान्त में मेहर चन्द्र, पंजाब प्रान्त में डॉ० गोकुल चन्द नारंग और बंगाल में डॉ० श्यामा प्रसाद मुखर्जी हिन्दू महासभा के कोटे से संयुक्त सरकारों में मंत्री रहे। हिन्दू महासभा के विभिन्न प्रान्तों में जम्मू कश्मीर से लेकर भारत के करीब सभी प्रान्तों में हिन्दू महासभा के विधायक रहे हैं। मध्यप्रदेश में 1952 में 14 विधायकों के साथ विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भी रही है, जिसके नेता निरंजन दास वर्मा, मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। राजस्थान विधानसभा में भी 1952 में दो विधायक निर्वाचित हुए थे। उसके पश्चात् भी सैकड़ों प्रत्याशियों ने हिन्दू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़कर सम्मानजनक स्थिति में रहे। 1990 में हिन्दू महासभा के सांसद गोरखपुर सीट से महन्त अवैधनाथ जी चुनाव जीतकर संसद में पहुँचे थे। परन्तु 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की भाजपा के सहयोग से सरकार बनी जब चुनाव आयोग ने हिन्दू महासभा के चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। परन्तु दिल्ली उच्चतम न्यायालय से विजय हुई जिसके कारण से आज हिन्दू महासभा पुनः चुनाव मैदान में है। 1952 में हिन्दू महासभा के सदस्य राज्य सभा में पहुँचे थे। कई बार विभिन्न विधान परिषदों में भी हिन्दू महासभा के सदस्य निर्वाचित हुए थे।

हिन्दू महासभा का ऐतिहासिक कार्य

  • 1882 से 1914: इस काल में न्यायालयों में उर्दू ही कामकाज की भाषा थी। परन्तु हिन्दू महासभा ने प्रचण्ड आन्दोलन चलाकर हिन्दी में भी कार्य करने की स्वीकृति दिलाई।

    • : इस काल में हिन्दुओं के धर्मान्तरण, अत्याचार व अन्य हितों के लिए संघर्ष।

    • : बंगाल में वन्देमातरम् और बंग भंग आन्दोलन में भूमिका। उस काल में बंगाल में हिन्दू महासभा की स्थापना हो चुकी थी।

  • 1914–1916: इस काल में अंग्रेज गंगा की धारा को रोकना चाह रहे थे परन्तु हिन्दू महासभा के विरोध के कारण यह विचार त्यागना पड़ा।

  • 1916: लखनऊ में कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसके फलस्वरूप ऐसी सीटें रखी जानी थी, जिससे सिर्फ मुस्लिम प्रत्याशी ही चुनाव लड़ सकते थे। परन्तु हिन्दू महासभा के प्रबल विरोध के कारण कांग्रेस व अंग्रेजों को झुकना पड़ा।

  • 1922–1923: हिन्दू महासभा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानन्द ने 4,50,000 मल्कानी मुसलमानों को शुद्धि कर हिन्दू बनाया।

    • 1928: जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें महाराष्ट्र से सिन्धुओं का अलग प्रान्त बनाना था, परन्तु हिन्दू महासभा ने उस वक्त ऐसा नहीं होने दिया। हालांकि बाद में अंग्रेज व मुस्लिम लीग व कांग्रेस के सयुक्त प्रयास से सिन्ध महाराष्ट्र से अलग हो गया था। परन्तु 1928 में हिन्दू महासभा ने ऐसा नहीं होने दिया। सिन्ध से महाराष्ट्र का अलग होना देश विभाजन का मुख्य कारण रहा।

    • 1933–1934: हिन्दू महासभा ने 1933–34 में बौद्ध भिक्षु उत्तम को अध्यक्ष चुना तथा कई देशों के प्रतिनिधि बौद्धों ने हिन्दू महासभा के प्रयासों से अपने को हिन्दू होना स्वीकारा।

    • 1939: हैदराबाद सत्याग्रह। हैदराबाद निजाम द्वारा हिन्दुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना रखा था। हिन्दुओं पर कई प्रकार के अत्याचार हो रहे थे। उसका हिन्दू महासभा ने विरोध किया और बहुत बड़ा आन्दोलन चलाया। हजारों हिन्दू महासभा के कार्यकर्त्ताओं ने गिरफ्तारियाँ दीं और कई दिनों तक निजाम की जेलों में रहे। इस आन्दोलन को कांग्रेस, निजाम व अंग्रेजों के विरोधों के बावजूद ऐतिहासिक आन्दोलन हुआ।

      1941 :भागलपुर सत्याग्रह। अंग्रेजों ने हिन्दू महासभा के अधिवेशन पर प्रतिबन्ध लगा दिया परन्तु हिन्दू महासभा ने सत्याग्रह कर सम्मेलन किया।

      1942–1947 :सिन्ध में सत्यार्थ प्रकाश पर प्रतिबन्ध लगाया गया परन्तु हिन्दू महासभा के प्रबल आन्दोलन से सत्यार्थ प्रकाश से प्रतिबन्ध वापस लिया गया।

      :हिन्दू महासभा ने 1942 से लेकर 1947 तक राजनीति का हिन्दूकरण, हिन्दुओं का सैनिकीकरण प्रसिद्ध अभियान चलाया। इस काल में सेना में हिन्दू सैनिकों की कम संख्या थी परन्तु इस अभियान से सेना में भारी संख्या में हिन्दुओं की बढ़ोत्तरी हुई।

      अखण्ड भारत आन्दोलन : हिन्दू महासभा ने मुस्लिम लीग, अंग्रेजों और कांग्रेस के देश विभाजन के खतरनाक मंसूबों से अवगत कराते हुए पूरे देश में देश विभाजन के खिलाफ आन्दोलन चलाया। वीर सावरकर ने 1942 में कांग्रेस के भारत छोड़ो आन्दोलन को भारत तोड़ो में बदलेगा, देश व जनता को सचेत किया था। परन्तु दुर्भाग्य से देश की जनता ने सावरकर जी की भविष्यवाणी को गम्भीरता से नहीं लिया परिणामस्वरूप देश का विभाजन हुआ। देश विभाजन होने के पश्चात हिन्दू महासभा ने 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे अखण्ड भारत समारोह मनाकर पुनः अखण्ड भारत बनाने का संकल्प लिया तथा हिन्दू महासभा के प्रयासों से वर्तमान बंगाल व पंजाब पाकिस्तान में जाने से बचा।

      1947–1949 :पाकिस्तान से आये हुए हिन्दुओं के पुनर्वास में सराहनीय कार्य रहा।

      1950 :रामजन्म भूमि अयोध्या में रामलला प्रकटोत्सव सफलता के साथ सम्पन्न कराया।

      1953 :हिन्दू महासभा के सांसद एन० सी० चटर्जी के नेतृत्व में कश्मीर आन्दोलन में सैकड़ों लोगों द्वारा भागीदारी।

      1956 :कृष्ण जन्म भूमि मथुरा और काशी विश्वनाथ मन्दिर का आन्दोलन चलाया।

      1966 :गौ रक्षा आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका।

      1993–1994 :राम कृष्ण मिशन द्वारा अपने को अल्पसंख्यक घोषित करना। अपने को अहिन्दू घोषित करना। उसके खिलाफ हिन्दू महासभा न्यायालय में याचिका दायर कर इनको हिन्दू घोषित करने में सफलता। इसी प्रकार आर्य समाज ने भी हिन्दुओं को अपने से अलग होना बताया, परन्तु ये सर्वोच्च न्यायालय में नहीं गये। अतः हिन्दू महासभा के प्रयासों से हिन्दुओं से दूर नहीं गये।

      1990 :चुनाव आयोग द्वारा हिन्दू महासभा पर प्रतिबन्ध और हिन्दू महासभा द्वारा संघर्ष। उच्च न्यायालय द्वारा विजय मिली। परिणाम स्वरूप आज चुनाव लड़ रही है एवं एक महत्वपूर्ण राजनैतिक पार्टी है।

      2005–2006 :आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों को आरक्षण हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अपाध्यक्ष के० मुरलीधर राव ने न्यायालय में याचिका दायर कर आरक्षण पर रोक लगवाई।  

      वर्तमान अभियान

      अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्ना कुमार शर्मा, राष्ट्रीय महामंत्री श्री सुनील कुमार एवं राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री श्री वीरेश कुमार त्यागी के नेतृत्व में अखण्ड हिन्दू राष्ट्र के निर्माण व हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्थान की रक्षा का कार्य पूर्ण तत्परता व सक्रियता पूर्वक कर रही है। अयोध्या में भगवान श्री राम के जन्मस्थान पर भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिये उच्चतम न्यायालय में मुकदमा जीत चुके है। सुप्रीम कोर्ट से विजयश्री के उपरान्त मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। और वह निर्माण पूर्ण हो चुका है। श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। श्रीराम सेतु की रक्षा, गंगा नदी की अविरल धारा को सुरक्षित रखने, जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने, गौहत्या पर पूर्णरूप से प्रतिबन्ध लगाने, समान आचार संहिता लागू कराने, देश के सभी मंदिरों में आरती का एक निश्चित समय तय करने, विदेशी बैंकों में जमा कालाधन को वापस भारत लाने, मंदिरों के अधिग्रहण को पूर्ण रूप से रोकने, महिलाओं की सुरक्षा के लिये अपराध कानून में परिवर्तन लाने हेतु विशेष अभियान अखिल भारत हिन्दू महासभा द्वारा पूरे देश में चलाया जा रहा है। हिन्दू महासभा के प्रयासों के कारण केन्द्र सरकार ने कश्मीर से धारा-370 को समाप्त कर दिया है। हिन्दू महासभा काशी विश्वनाथ एवं श्रीकृष्ण जन्म स्थान मंदिर निर्माण के लिये पूरे देश में जागरूकता लाने का कार्य कर रही है। धर्मान्तरण को रोकने व घर वापसी के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। हिन्दू महिलाओं को बचाने के लिये लव-जेहाद के विरूद्ध जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। जाति प्रथा को समाप्त करने व हिन्दू एकता के लिये पूरे देश में जागृति लाई जा रही है।