vivah karyalay

Vivah

हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्षों स्वामी श्रद्धानंद जी एवं स्वातंत्र्य वीर सावरकर जी द्वारा स्थापित विवाह कार्यालय जातिरहित,दहेजरहित विवाह संपन्न कराती है।यह व्यवस्था अखिल भारत हिन्दू महासभा के मुख्यालय हिन्दू महासभा भवन,मंदिर मार्ग,नईदिल्ली में पूर्णतः निःशुल्क संचालित हो रही है।

हिंदू महासभा के जातिरहित एवं दहेजरहित विवाह

कार्य एवं उद्देश्य: जातिरहित एवं दहेजरहित विवाह का उद्देश्य समाज में समानता,सामाजिक समरसता और कुरीतियों के उन्मूलन को बढ़ावा देना है।
अखिल भारत हिन्दू महासभा द्वारा ऐसे विवाह आयोजित किए जाते हैं।
अखिल भारत हिन्दू महासभा के विवाह संबंधी प्रमुख कार्य एवं उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

उद्देश्य-
1. जातिगत भेदभाव का उन्मूलन
* समाज में जाति-आधारित भेदभाव और ऊँच-नीच की भावना को समाप्त करना।
* विभिन्न जातियों के बीच सामाजिक एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना।
1 . दहेज प्रथा का विरोध
* विवाह को आर्थिक लेन-देन के बजाय एक पवित्र सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्कार के रूप में स्थापित करना।
* दहेज प्रथा से उत्पन्न सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को कम करना।
1. सामाजिक समरसता को बढ़ावा
* सभी वर्गों और जातियों के बीच भाईचारे एवं समानता की भावना विकसित करना।
* राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को सुदृढ़ करना।
1. महिला सम्मान एवं सशक्तिकरण
* महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना।
* विवाह में स्त्री और पुरुष के समान अधिकारों को प्रोत्साहित करना।
1. सरल एवं सादगीपूर्ण विवाह को प्रोत्साहन
* विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च को कम करना।
* समाज में सादगी और संयम की संस्कृति को बढ़ावा देना।

कार्य-
1. जातिरहित एवं दहेजरहित विवाह समारोहों का आयोजन
* इच्छुक परिवारों एवं युवाओं को मंच प्रदान करना।
* सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करना।
1. जनजागरण अभियान चलाना
* दहेज प्रथा एवं जातिगत भेदभाव के विरुद्ध जागरूकता फैलाना।
* संगोष्ठियों,सभाओं एवं सामाजिक अभियानों का आयोजन करना।
1. विवाह परामर्श एवं सहायता
* विवाह के इच्छुक युवक-युवतियों एवं परिवारों को मार्गदर्शन प्रदान करना।
* कानूनी एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना।
1. युवा पीढ़ी को प्रेरित करना
* युवाओं को समानता,सामाजिक न्याय एवं राष्ट्रीय एकता के मूल्यों से जोड़ना।
* दहेज-मुक्त एवं जाति-मुक्त वैवाहिक संबंधों को सम्मान देना।
1. सामाजिक सुधार के लिए सहयोग
* अन्य सामाजिक संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर कुरीतियों के उन्मूलन हेतु कार्य करना।

जातिरहित एवं दहेजरहित विवाह की अवधारणा सामाजिक सुधार,हिन्दू परिवारों के बीच समानता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है, जिसका व्यापक उद्देश्य एक समरस एवं प्रगतिशील हिन्दू समाज का निर्माण करना है।